हिस्ट्री के सबसे बड़े नॉन न्यूक्लियर धमाकों में से एक ब्लैक टॉम धमाके ने स्टैचू ऑफ लिबर्टी को काफी नुकसान पहुंचाया लेकिन इसे गिरा नहीं सका। स्टैचू का मजबूत आयरन फ्रेम इन फ्लैट बार्स के जरिए कॉपर स्किन से जुड़ा हुआ है। खास बात यह है कि यह फ्लैट बर्स मुड़ने की क्षमता रखते हैं अब सोचिए अगर कॉपर स्किन पर कोई मजबूत फोर्स लगती है तो क्या होगा? आप देख सकते हैं कि ये फ्लैट बार्स मुड़ रहे हैं। यह फ्लेक्सिबल बर्स स्प्रिंग आइसोलेटर की तरह काम करते हैं और स्टैचू पर लगने वाले fोर्स को काफी कम कर देते हैं उस दिन स्टैचू को गिरने से बचाया गया। इस स्टैचू की खूबसूरती इसकी कॉपर स्किन में है जो आप देख रहे हैं वह सही है। स्टैचू एक सॉलिड पीस की तरह दिखता है लेकिन असल में यह कई कॉपर शीट से बना है जो सिर्फ 2.3 एए मोटी है। यह कॉपर शीट्स को रिवेट करके जोड़ा गया है ताकि इस खूबसूरत स्टैचू को तैयार किया जा सके। सबसे जरूरी बात यह है कि कैसे इतनी परफेक्शन के साथ वे लेडी लिबर्टी के सारे डिटेल्स कॉपर शीट्स पर उकेरना बड़े स्टैचू पर यह सारे छोटे-छोटे डिटेल्स उन्होंने कैसे उके होंगे इस खूबसूरत स्टैचू के पीछे जो जीनियस है वो है मिस्टर बार्ट होल्डी यह है उनकी पहली क्ले मॉडल जो 4 फीट ऊंची थी वह इस 4 फीट के मॉडल को 151 फीट ऊंचे फाइनल मॉडल में बदलना चाहते थे लेकिन इतनी बड़ी स्केलिंग के लिए सामान्य पेंटो ग्राफ स्केलिंग तकनीक काम नहीं करती इसके बजाय मिस्टर बार्ट होल्डी ने एक गजब के मेथड का इस्तेमाल किया प्लम लाइंस का मेथड। आइए इस स्केलिंग ऑपरेशन को तीन स्टेजेस में समझते हैं। सबसे पहले ओरिजिनल क्ले मॉडल को सही दूरी पर रखी गई प्लम लाइन से घेर लिया गया दूसरे मॉडल का प्लम स्ट्रक्चर ओरिजिनल मॉडल से ठीक दो गुना बड़ा था दूसरा मॉडल लगभग 8 फीट लंबा था और आर्टिस्ट्स को पहले इसे संभालने के लिए एक लकड़ी का ढांचा बनाना पड़ा। अगर आपको उसकी नाक को बड़ा करना है तो पहले नाक पर कुछ मुख्य पॉइंट्स को मार्क करना होगा इस पॉइंट पर ध्यान दें सबसे पहले उन्हें एक प्लेन डालकर इस पॉइंट को टच करना पड़ा इस पॉइंट का z लोकेशन आसानी से मापा जा सकता था। अब दो और कोऑर्डिनेट्स मापने बाकी थे x और y यह साफ था कि नाक का यह पॉइंट इन दो प्लंब लाइंस के बीच में था इससे उन्हें एक्स कोऑर्डिनेट को मापने में आसानी हुई इसी तकनीक का इस्तेमाल वा कोऑर्डिनेट मापने के लिए भी किया गया नाक को फिर से बनाने के लिए उन्हें इस तरह कई पॉइंट्स मापने पड़े अगर आपको नाक को दो गुना बड़ा करना है तो बस इन सब की वैल्यूज को दो से मल्टीप्लाई कर दीजिए। दूसरी तरफ एक लकड़ी का ढांचा तैयार था जिसे प्लास्टर से ढका जाना था वर्कर्स ने नाक को प्लास्टर से ढकना शुरू किया लेकिन उन्हें मापे गए मेजरमेंट के अनुसार ही इसे करना था जब आप डाटा वैल्यूज के अनुसार प्लास्टर का काम पूरा कर लेते हैं तो नाक सही से बड़ी हो जाती है। ऐसे हजारों डेटा पॉइंट्स का इस्तेमाल पूरे मॉडल को बड़ा करने में किया गया और स्केलिंग ऑपरेशन को दोबारा मेजरमेंट के जरिए आसानी से क्रॉस चेक किया जा सकता था ऐसा माना जाता है कि बार्ट होल्डी ने दो और स्केलिंग ऑपरेशंस किए ताकि वह फाइनल फुल साइज के मॉडल तक पहुंच सके और हर बार स्टैचू में और ज्यादा डिटेल्स जोड़ी गई वह फाइनल प्लास्टर मॉडल को अपने स्टूडियो में नहीं रख पाए इसलिए उन्हों ने स्टैचू को कई पीसे में बांट दिया। अब आता है रेप्पू से ऑपरेशन का जादू फाइनल प्लास्टर मॉडल से वर्कर्स ने एक लकड़ी का ढांचा बनाया यह लकड़ी का ढांचा स्टैचू के एक हिस्से के शेप के अनुसार था पतली कॉपर प्लेट्स को लकड़ी के ढांचे के ऊपर रखा गया और फिर उन्हें हथौड़े से पीटा गया इस तरीके से कॉपर प्लेट्स ने प्लास्टर मॉडल का वही सटीक आकार ले लिया चूंकि हथौड़े से पीटने का काम अंदर की तरफ से किया गया इसलिए बाहर की सतह बिल्कुल स्मूथ रही बिना किसी हथौड़े के निशान के फ्रेंच वर्कर्स ने कुल 300 ऐसी कॉपर प्लेट्स बनाई थी अब चुनौती यह थी कि इन अलग-अलग प्लेट्स को एकदम परफेक्ट और मजबूती से कैसे जोड़ा जाए इसके लिए उन्होंने रिवेटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया यहां आपके लिए एक इंटरेस्टिंग सवाल है स्टैचू के कपड़ों पर आप आसानी से ओवरलैपिंग कॉपर प्लेट्स और छोटे-छोटे रिबट्स देख सकते हैं लेकिन चेहरे पर हमें कोई ओवरलैपिंग या रिवेट्स दिखाई नहीं देते यही बात हाथों और पैरों पर भी लागू होती है इन जगहों पर आप बस एक हल्की लाइन देख सकते हैं यह कैसे पॉसिबल है जैसा कि दिखाया गया है नॉर्मल रिवर्टिंग मेथड में दोनों तरफ रिवर्ड हेड्स होते हैं लेकिन स्टैचू को एक खूबसूरत लुक देने के लिए इंजीनियर्स ने इन हिस्सों में काउंटर संक रिवेट्स का इस्तेमाल किया चूंकि इन जगहों पर शीट्स ओवरलैप नहीं हो रही थी इसलिए उन्होंने एक और कॉपर स्ट्रिप जोड़ी और फिर रिवर्टिंग का काम किया इस तकनीक से रिवर्ट्स के बाहरी हिस्से की कोई प्रोजेक्शन नहीं होती और स्टैचू को एक पॉलिश्ड लुक मिलता है इस बात का कितनी बारीकी से ध्यान दिया गया था यह इस तकनीक से पता चलता है रिवेटेड कॉपर प्लेट्स को आयरन आर्मेचर स्ट्रिप्स का सपोर्ट दिया गया अब अगला बड़ा सवाल यह था कि इन टुकड़ों को खड़ा कैसे किया जाए ताकि तेज हवा के के दबाव से भी यह गिरे नहीं इन प्लेट्स को मजबूत इंटरनल सपोर्ट की जरूरत थी बाड होल्डी जिन्हें इस सपोर्ट सिस्टम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी वे उस समय के सबसे मशहूर आर्किटेक्ट यूजीन वायलेट ले ड्यूक के पास गए यूजीन का समाधान था एक सेट मेजरी वॉल्स का जो कई कंपार्टमेंट्स में बटी हुई थी इन कंपार्टमेंट्स को बाद में रेत से भरा जाना था और फिर कॉपर स्किन पूरे ढांचे को कवर कर लेती यह स्ट्रक्चर तेज हवा के दबाव से पूरी तरह से सुरक्षित था बाट होल्डी ने सोचा कि अब उनकी इंजीनियरिंग प्रॉब्लम्स खत्म हो गई है हालांकि [संगीत] 18792 अलग था यह पतला और मॉडर्न था यह चार बहुत बड़े बीम्स जो ऊपर की ओर पतली होती जाती है आफल के स्ट्रक्चर के अंदर मुख्य सेंट्रल पाइनस हैं इस स्ट्रक्चर को हॉरिजॉन्टल और इंक्लाइंड बार से मजबूत किया गया था देखिए उन्होंने स्टैचू के हाथ के लिए सपोर्टिंग स्ट्रक्चर कैसे डिजाइन किया सेंट्रल पायलोन के मुख्य कॉलम्स में गिड्स का एक सेट फिट किया गया था यह गिड्स पेडेस्टल पर रखे गए थे अब शुरू होती है टेंशन बार्स की लंबी यात्रा यह बार्स लोअर ग्रेडर से जुड़ी थी जो पेडेस्टल में एंबेडेड थी इन टेंशन बार्स के बड़े नट्स को टाइट करके स्टैचू की पूरी आयरन स्ट्रक्चर को पेडेस्टल से मजबूती से जोड़ा गया आफल ने इस आयरन स्ट्रक्चर को बहुत ही मजबूत बना दिया क्या जीनियस थे वोह जैसा कि हमने पहले सीखा फ्लेक्सिबल फ्लैट बार्स कॉपर स्किन को मजबूत आयरन फ्रेम से जोड़ती हैं इस तरह आफल ने सुनिश्चित किया कि उनका स्ट्रक्चर हवा में थोड़ा बहुत हिले लेकिन गिरे नहीं स्टैचू लिटी का छोटी मॉडल में मैंने यूज किया है मोटा बास v जोड़ती है स्टैचू के स्किन और सेंट्रल कोर को जब मैं इसमें गोली चलाता हूं इस टच गिर जाती है दूसरे मॉडल में मैंने यूज किया है पथली और फ्लेक्सिबल बार्स जैसा कि आप देख सकते हैं यह स्टैचू गिरने से बच जाती है स्किन का वाइब्रेशन गोली के एनर्जी को अब्जॉर्ब करने के लिए सक्षम थी ध्यान दे यह बल्ट को बारीक करने के लिए हमने उसके अंदर स्टील बॉल्ड जोड़ी थी
हालांकि यहां उन्हें एक और प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा आयरन और कॉपर के बीच एक इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्शन हो रही थी अगर इन्हें सीधे जोड़ा जाता तो कुछ ही सालों में यह मेटल कोड हो जाता आफल ने इस प्रॉब्लम का समाधान शेलक कोटेड एस बेस्टस पीसेज को इन मटेरियल्स के बीच में लगा कर किया पेरिस में स्टैचू ऑफ लिबर्टी अपने अंतिम रूप और खूबसूरती को हासिल कर रही थी लेकिन न्यूयॉर्क में स्टैचू के पेडेस्टल को बनाने के लिए भारी फाइनेंशियल संकट का सामना करना पड़ा था इसके अलावा कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और मटेरियल को आयरलैंड तक पहुंचाना एक और बड़ी चैलेंज थी पेरिस में बिना पेडेस्टल के पूरी की पूरी स्टैचू अपनी फाइनल डेस्टिनेशन की ओर जाने का पेशेंटली इंतजार कर रही थी न्यूयॉर्क में उसके पेडेस्टल पर काम बेहद धीरे चल रहा था जनवरी 1885 में बाट होल्डी ने एक बड़ा कदम उठाया उन्होंने लेडी लिबर्टी को ट्रेवल के लिए तैयार करने का फैसला किया इसे ध्यान से खोलने में वर्कर्स को लगभग आधा साल लग गया उन्होंने स्टैचू ऑफ लिबर्टी को 214 लकड़ी के बॉक्सेस में पैक किया और इसे एक फ्रेंच नेवी शिप पर लोड कर दिया न्यूयॉर्क में फंड रेसिंग कमेटी को पैसे जुटाने में बहुत स्ट्रगल करना पड़ रहा था और एक समय ऐसा भी लगा कि लेडी लिबर्टी के लिए पेडेस्टल बनाना एक इंपॉसिबल ड्रीम बन चुका था लेकिन तभी जोसेफ पलिज जो एक अखबार के पब्लिशर थे ने कमान संभाली उन्होंने अपने अखबार द वर्ल्ड में अपने खुद के फंड रेसिंग कैंपेन की शुरुआत की अपने एडिटोरियल्स में उन्होंने उन अमीर अमेरिकंस का मजाक उड़ाया जिन्होंने स्टैचू के लिए कंट्रीब्यूट नहीं किया और उ आम अमेरिकंस का सम्मान किया जिन्होंने डोनेट ट किया उनके नाम छापक सिर्फ एक महीने में पुलित्जर ने $5000 जुटाए 17 जून 1885 को एक शानदार स्वागत के साथ फ्रेंच शिप लेडी लिबर्टी के बॉक्सेस के साथ न्यूयॉर्क हार्बर पहुंची लेकिन उसके खड़े होने के लिए कोई पेडेस्टल नहीं था इसलिए बॉक्सेस को स्टोरेज में रख दिया गया कई अन्य अखबारों ने द वर्ल्ड की इस पहल को अपनाया और जनता का उत्साह बहुत बढ़ गया अगस्त 1885 तक कमेटी ने $ लाख डलर जुटाने का अपना लक्ष्य पूरा कर लिया यह कटा हुआ कंक्रीट पिरामिड स्टैचू के पेडेस्टल का बेस है पूरी स्टैचू का भार एक 4.5 मीटर गहरी मैट फाउंडेशन पर टिका हुआ है इन बड़े ग्रेनाइट ब्लॉक्स का इस्तेमाल पेडेस्टल के कंस्ट्रक्शन के लिए किया गया आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भारी ग्रेनाइट ब्लॉक्स को बार्जेस और शिप्स के जरिए आइलैंड तक ले जाने में कितनी मेहनत लगी होगी मटेरियल को उठाने के लिए भाप से चलने वाले क्रेंस और डेरेक्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया वर्कर्स ने ग्रेनाइट ब्लॉक्स की कुशल असेंबली और कंक्रीट का काम शुरू किया उन्होंने बीच में एक खाली जगह छोड़ी जहां एंट्री एरिया सीढ़ियों और एलिवेटर बनानी थी लेवल 6 प पर उन्होंने एक ऑब्जर्वेशन डेक बनाया जैसे ही पेडेस्टल तैयार हुआ वर्कर्स ने आयरन सेंट्रल पायलोन की असेंबली शुरू की दरअसल यह फिर से असेंबल करने का काम था गुस्ताव आफल ने फ्रांस में बैठकर इस आयरन फ्रेमवर्क को सही तरीके से फिर से जोड़ने के लिए एक सटीक योजना और स्पेसिफिकेशंस तैयार की थी आप डबल हीलिक्स सीढ़ियों के निर्माण में भी उनकी परफेक्ट प्लानिंग देख सकते हैं यह सीढ़ी स्टैचू की टॉर्च तक जाएगी हम इस पर बाद में फिर से चर्चा करेंगे उनकी इंजीनियरिंग टीम की देखरेख में वर्कर्स ने असेंबली का काम एकदम सही ढंग से पूरा किया अब बचा हुआ काम कॉपर स्किन को आयरन फ्रेम की फ्लेक्सिबल बार से जोड़ने का था इस काम के लिए अब मचान की जरूरत नहीं थी वर्कर्स को रिवेटिंग करने से पहले दोनों प्लेट्स के छेद को एकदम सही से मिलाना पड़ता था पाट होल्डी ने स्टैचू के रिकंस्ट्रक्शन में एक अहम भूमिका निभाई उन्होंने इसके लिए कई बार अमेरिका की यात्रा की 28 अक्टूबर 18864 स्टैचू के चेहरे को फ्रेंच झंडे से ढका गया था और मिस्टर बाट होल्डी इसके अंदर क्राउन में खड़े थे झंडे को पकड़े हुए जब बाट होल्डी ने झंडा गिराया तब ऑफिशियल स्टैचू को लोगों को समर्पित किया गया स्टैचू के खास हरे रंग को बनने में लगभग 20 साल लगे यह दरअसल एक पटी नामक परत है जो हवा के साथ ऑक्सीडेशन रिएक्शन से बनी है यह परत कॉपर को आगे कोरोजन से बचाने का काम करती है 1984 में जब स्टैचू की रिस्टो मेशन की गई तब अथॉरिटीज को जंग लगे इंटरनल आर्मेचर बार्स को बदलना पड़ा लेकिन कॉपर स्किन पर ज्यादा मरम्मत का काम नहीं करना पड़ा इसी रेस्टोरेशन के दौरान पुरानी टॉर्च को बदलकर एक और ज्यादा स्टाइलिश टॉर्च लगाई गई पुरानी टॉर्च इतनी ज्यादा खराब हो गई थी कि उसे रिस्टोर नहीं किया जा सकता था अगर आप बार्ट होल्डी के कारीगरों द्वारा किए गए मेहनत की सराहना करना चाहते हैं तो लेडी लिबर्टी के कपड़ों की डिटेल्स को देखिए कारीगर आसानी से कॉपर शीट्स को सीधे जोड़कर काम कर सकते थे जैसा कि दिखाया गया है नीचे खड़े दर्शक कभी भी इस शॉर्टकट को पकड़ नहीं पाते लेकिन कारीगरों ने बड़े ध्यान से काम किया और कपड़े के दोनों किनारों को बनाया जो कि एक मेटल वर्क था और इसके अंदर के जॉइंट्स को जोड़ना बहुत मुश्किल था स्टैचू ऑफ लिबर्टी पर चढ़ना एक मजेदार एक्सपीरियंस है आप या तो एलिवेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर सीढ़ियां चढ़ सकते हैं और पहले ऑब्जर्वेशन गैलरी तक पहुंच सकते हैं यहां पर आप थोड़ा आराम कर सकते हैं कुछ और सीढ़ियां चढ़ने के बाद असली चढ़ाई शुरू होती है खूबसूरत लिकल सीढ़ियों से होते हुए स्टैचू के क्राउन तक पहुंचना ध्यान रखें इस बार सिर्फ सीढ़ियां हैं एलिवेटर नहीं हमें ऊपर पहुंचने के लिए 146 सीढ़ियां चढ़ होंगी अगर आप इस चढ़ाई के दौरान थक जाते हैं तो बीच-बीच में कुछ रेस्टिंग पॉइंट्स हैं जब आप ऊपर च चढ़ रहे होंगे तो आप देख सकते हैं कि ऊपर एक और लिकल सीढ़ी है यह सीढ़ी चढ़ने के लिए नहीं बल्कि उतरने के लिए इस्तेमाल की जाएगी जब आप ग्राउन तक पहुंचते हैं तो आप न्यूयॉर्क हार्बर के खूबसूरत पानी का व्यू देख सकते हैं अब आइए देखें कि स्टैचू के सबसे ऊंचे पॉइंट टॉर्च गैलरी तक कैसे पहुंचा जाए 1916 में ब्लैक टॉम धमाके के बाद टॉर्च तक का रास्ता बंद कर दिया गया था अगर यह रास्ता बंद नहीं होता तो आप एक और अद्भुत चढ़ाई और व्यू का आनंद ले सकते थे लेडी लिबर्टी ने 1954 में आए खतरनाक तूफान हरिकन हेजल का सामना किया और इसका श्रेय जाता है आफल की शानदार इंजीनियरिंग को हमारे एनालिसिस के अनुसार यह तूफान जो 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा था स्टैचू को 4 इंच और टॉर्च को 7 इंच तक हिला सकता था 1916 में हुए ब्लैक टॉम धमाके ने स्टैचू को गंभीर नुकसान पहुंचाया यह विस्पोट 5.5 रिक्टर स्केल पर मापा गया और इससे जबरदस्त शॉक वेव्स उत्पन्न हुई धमाके से निकले शार्प नेल्स ने स्किन को भारी नुकसान पहुंचाया इंटरेस्टिंग बात यह है कि इस घटना के दौरान स्टैचू की टॉर्च जलती रही हालांकि स्टैचू की कांच की टॉर्च टूट गई थी हाथ और आंतरिक स्ट्रक्चर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा मरम्मत के बाद अथॉरिटीज ने यह फैसला किया कि टॉर्च गैलरी को स्थाई रूप से विजिटर्स के लिए बंद कर दिया जाएगा शायद उन्हें यह डर था कि मरम्मत किया गया स्ट्रक्चर आईल के ओरिजिनल स्ट्रक्चर जितना मजबूत नहीं था अब आइए मिस्टर गुटा आफल को ट्रिब्यूट देते हैं और उनका स्ट्रक्चर डिजइन पर हवा चलाता [संगीत] है बार का फ्लेक्सिबल देखने के लिए बहुत मजा आया.

